Makar sankranti 2023 (मकर संक्रांति )

हेलो फ्रेंड स्वागत है मेरे इस ब्लॉग में एक नई टॉपिक के साथ l मकर संक्रांति तो आप सभी मनाते होंगे लेकिन इस पर्व के बारे में अगर आपको दिलचस्प जानकारी मिलेगी तो इस पर्व को मनाने में आपकी खुशी दोगुनी हो जाएगी l जनवरी में ठंडी ठंडी सुबह में हल्की हल्की सूर्य की किरणें सुहावना मौसम और मकर संक्रांति का त्यौहर। कितना खुशनुमा माहौल होता है हम सब जानते हैं मकर संक्रांति हर साल जनवरी में 14 जनवरी को मनाया जाता हैl कभी-कभी पृथ्वी की गति और स्थितियों के कारणों से यह 1 दिन आगे या पीछे हो जाता है इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को हैl
Makar sankranti 2023 (मकर संक्रांति )


हिंदू महीने के अनुसार हिंदू महीने के अनुसार पौष शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मकर संक्रांति मनाया जाता है मकर संक्रांति पूरे भारतवर्ष में और नेपाल में मुख्य रूप से फसल कटाई के त्योहार के रूप में मनाया जाता है lहरियाणा और पंजाब में इसे लोहरी के रूप में 1 दिन पहले 13 जनवरी को ही मनाया जाता है lइस दिन उत्सव के रूप में स्नान दान किया जाता है तिल और गुड़ के पकवान बांटे जाते हैं पतंग उड़ाए जाते हैं ।मकर संक्रांति सभी मनाते हैं पर ज्यादातर लोग इस त्योहार के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते इसलिए हम आपके लिए लेकर आए हैं कुछ रोचक बातें ।तो आइए जानते हैं मकर संक्रांति के बारे में कुछ दिलचस्प बातें हैं।


मकर संक्रांति क्यों कहा जाता है।
मकर संक्रांति पर्व मुख्यता सूर्य पर्व के रूप में मनाया जाता है ।इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है एक राशि को छोड़कर दूसरे में प्रवेश करने की सूर्य की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते हैं । सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस समय को मकर संक्रांति कहा जाता है।इस दिन सूर्य दक्षिणायन से अपनी दिशा बदल कर उत्तरायण हो जाता है अर्थात सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ने लगता है ।जिससे दिन की लंबाई बढ़ने और रात की लंबाई छोटी होने लगती है इसलिए हमारे भारत में इस दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है और इस कारण से मकर संक्रांति को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है।


मकर संक्रांति और पतंग महोत्सव।
पहले के समय में सुबह सूर्योदय के साथ ही पतंग उड़ाना शुरू हो जाता था पतंग उड़ाने के पीछे मुख्य कारण है कि कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना यह समय सर्दी के मौसम का होता है और इन मौसम में सुबह के सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक और त्वचा और हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है इस दिन गुजरात का पतंग महोत्सव बहुत प्रसिद्ध है।


तिलऔर गुड़ के पकवान।
सर्दी के मौसम में वातावरण का तापमान बहुत कम होने के कारण शरीर में रोग और बीमारी जल्दी लगते हैं। इसलिए इस दिन गुड़ और तिल से बने मिष्ठान खाए जाते हैं इन में गर्मी पैदा करने वाले तत्व के साथ ही शरीर के लिए लाभदायक पोषक पदार्थ भी होते हैं इसलिए इस दिन खास तौर पर तिल और गुड़ के लड्डू खाए जाते हैं।


स्नान दान धर्म पूजा।
माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि देव से क्रोध छोड़ कर उसके घर गए थे इसलिए इस दिन को सुख और समृद्धि का माना जाता है और इस दिन किए गए पवित्र नदी में स्नान दान पूजा आदि के पुण्य हजार गुना हो जाता है इसलिए इस दिन गंगा सागर में मेला भी लगता है।यह त्योहार पूरे भारत और नेपाल में फसलों के त्योहार के रूप में मनाया जाता है खरीफ की फसलें कट  चुकी होती हैं और खेतों में रवि की फसलें लहलहा रहे होती है खेतों में सरसों के फूल मनमोहक लगते हैं और पूरे देश में इस समय खुशी का माहौल होता है अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग स्थानीय तरीकों से मनाया जाता है। क्षेत्रों में विविधता के कारण इस त्यौहार में भी विविधता है दक्षिण भारत में इस त्यौहार को पोंगल के रूप में मनाया जाता है।उत्तर भारत में इसे लोहरी कहा जाता है मध्य भारत में इसे संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति को उत्तरायण ,माधी ,खिचड़ी आदि नाम से भी जाना जाता है।




मकर संक्रांति से जुड़े अन्य तथ्य।

मकर संक्रांति हिंदुओं के मुख्य त्यौहार में से है और इस त्योहार के बारे में पुराणों में भी वर्णन मिलता है ।कुछ मुख्य कारण और घटनाएं जो पुराणों में इस दिन को इंगित करता है वह इस प्रकार है।

(1)ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने मधु कैटभ के युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी उन्होंने मधु के       कंधों पर मंदार पर्वत रखकर उसे दबा दिया था इसलिए भगवान विष्णु इस दिन से मधुसूदन कहलाए।

(2)हिंदू पुराणों के अनुसार इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि देव जो मकर राशि का स्वामी है ,के घर मिलने जाते हैं            ज्योतिष की दृष्टि से सूर्य और शनि का तालमेल संभव नहीं है लेकिन सूर्य खुद अपने पुत्र के घर जाते हैं                 इसलिए पुराणों में यह दिन पिता-पुत्र के संबंधों में निकटता के रूप में मनाया जाता है

(3)गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भागीरथी ने इस दिन अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन       तर्पण किया था उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद ही गंगा समुंद्र में जा मिली थी इसलिए गंगासागर में मेला       लगता है

(4)दुर्गा ने महिषासुर का वध करने के लिए इसी दिन धरती पर कदम रखा था|

(5)पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही अपनी स्वेच्छा से प्राण त्यागे थे क्योंकि सूर्य के उत्तरायण            होने पर मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है।
       

 नए साल का पहला त्यौहार मकर संक्रांति आता है जिससे इस व्रत का महत्व और खुशियां दोगुनी हो जाते हैं।
आप सभी पाठकों को hello  leady ki  तरफ से मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।
                                                            

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