Ma Beti ka rishata kaisa hona chahiye.

 हेलो फ्रेंड स्वागत है मेरे इस ब्लॉग में एक नई टॉपिक के साथ आज का विषय है मां बेटी का रिश्ता कैसा होना चाहिए।

दुनिया के सबसे खास और अनमोल रिश्तो में से एक है मां बेटी का रिश्ता | एक फ्रेंड, एक टीचर, एक गाइड, एक सिस्टर सारे रिश्ते सिमटकर एक रिश्ते में आ जाते हैं और वो रिश्ता है मां बेटी का |पति के अलावा बेटी ही एक ऐसी होती है जिसके पास अपने दिल की बात शेयर कर सकते हैं |और बेटी तो मां के पास अपनी बातें शेयर करती ही है।दुनिया में हर जगह भगवान नहीं जा सकते तो मां को बना दिया| मां अगर भगवान है तो बेटियां भी Angel है| वह गुरूर है मां की, वह पूजा का फल है, वह तपस्या है मां की, वह परछाई है मां की इस दुनिया में बेटी की परेशानीऔर इच्छाओं को मां से बेहतर कोई दूसरा नहीं समझ सकता है| एक मां ही होती है जो अपनी बेटी के बिना कहे ही उसकी सारी परेशानी को समझ जाती है| मां बेटी का रिश्ता कभी न टूटने वाली डोर  से बंधा होता है ठीक इसी तरह अगर बेटी की कोई दोस्त होती है तो मां ही होती है| कहते हैं एक बच्चे की परवरिश में मां बाप समान रूप से भागीदार होते हैं लेकिन जैसे-जैसे बेटी बड़ी होती है उसकी परवरिश का पूरा जिम्मा मां पर आ जाती है मां बेटी के इस रिश्ते में जो अहम बात  हैं |वो  मैं आपसे शेयर करती हूं।

(1) मां बेटी  में फ्रेंड का रिश्ता होना चाहिए- जब बेटी बड़ी हो जाए तो उसे एहसास दिलाना चाहिए कि तुम्हें कोई भी परेशानी हो खुल कर बात करो| जो परेशानी होगी मिलकर  निपटाएगे|  हमेशा तुम्हारे साथ है और बेटी भी मां को सारी परेशानी बताया करे |मां को अपना फ्रेंड समझे |माँ आपसे ज्यादा मेच्यौर  है| वह बहुत से जिंदगी का उतार-चढ़ाव देखे हैं वह आपसे ज्यादा अनुभवी है मां पर भरोसा रखिए वह हमेशा आपके साथ रहेंगे।

(२) एक टीचर एक दूसरे के बने- मां तो बच्चों की पहली टीचर कही ही जाती है| क्योंकि हर काम बच्चों को पहले मां सिखाती है चलना, बोलना  कपड़े पहनना ,हर काम  माँ  से सीखती हैं| और बेटी ज्यादा नकल मां की ही करती है| और बेटी मां की भी टीचर बन जाती है| आजकल के बच्चे टेक्नोलॉजी में आगे  हैं| जैसे मां को मोबाइल चलाना नहीं आता, कंप्यूटर चलाना नहीं आता ,स्कूटी चलाना नहीं आता तो बच्चे ही तो सिखाते हैं तो बच्चे भी हुए ना माँ  के गुरु।

(3)एक Guide  की तरह रहना-  मां बेटी को हर तरीके से गाइड करती है हर संस्कार उसमें भरती  हैं| अच्छे से बोलो ढंग से कपड़े पहनो, घर में या बाहर छोटे बड़ों से सही तरीके से बातें करो , सभी बातें  मां बताती हैं| हमारी क्या सीमा है |क्या  लक्ष्मणरेखा   है जिसे हम पार नहीं कर सकते| कौन सही है |कौन गलत है| हम क्या कर सकते हैं, क्या नहीं कर सकते हैं सारी चीजें वह गाइड करती है |और कभी-कभी हमारी बेटी भी गाइड  करती है| मान लीजिए  मां- पापा में, या घर के किसी भी मेंबर से झगड़े होते हैं, तो बच्चे बिना किसी के पक्ष लिए बताती है कि गलती किसकी थी| और अगर हमारी गलती बताती है,और हमें एहसास होता है तो हम वह गलती दोबारा नहीं करते हैं| तो हुइ ना हमारी बेटी हमारी गाइड।

(4) एक सिस्टर की तरह रिश्ता होना चाहिए -जैसे दो बहन घर में मिलकर रहती है, मिलकर काम करती है, मिलकर टीवी देखती है, मिलकर शॉपिंग करती है, मिलकर खाना बनाती है ,जब बेटी बड़ी होती है तो ऐसे  ही तो मां बेटी में होता है| तो बहन की तरह हुई ना।

(5)एक दूसरे को स्पेस दे - हर चीज में अति ,ज्यादा, अत्यधिक, अच्छा नहीं होता है| मान लीजिए मां है तो बेटी के प्रति चिंताएं होती है लेकिन  इसका मतलब ये  नहीं होना चाहिए कि हर पल उसके पीछे पीछे रहे| तुम किस  से बातें करती हो| तुम अपने दोस्तों से बात नहीं कर सकती हो ,तुम वो  नहीं कर सकती ,तुम ये  नहीं कर सकती हो| उसको सही गलत के बारे में बतलाइए |  लेकिन वह बड़ी हो गई है उसे भी सही गलत को समझने दीजिए |उसे भी अपने आप को समझने के लिए समय दीजिए| और विश्वास सबसे बड़ी बात है और उस विश्वास का बेटी पर जतलाए | कि हमें तुम पर पूरा विश्वास है कि तुम ऐसी कोई गलत काम नहीं करोगी | जिससे हमें नजरें नीची करने पड़े | फिर देखिए वह आपकी इस विश्वास को कभी ना तोड़ेंगी।

(6 )एक दूसरे को मोटिवेट करना -मां हमेशा अपनी बेटी को मोटिवेट करें| उसे आत्मनिर्भर बनाना सिखाएं उसे मत एहसास दिलाया कि वह एक बेटी है बेटा से कम है लड़का लड़की दोनों बराबर है जिस फिल्म में उसका इंटरेस्ट है जो वह बनना चाहती है उसके लिए उसे हौसला दीजिए और बेटियां भी मां से अगर कोई स्कीम स्किल कोई हुनर है तो मोटिवेट करेगी हां मां आप यह कर सकते हो कहीं मां के पास बहुत सारे स्किल होने के बाद भी वह घर परिवार के कामों में उलझ गए कुछ कर नहीं पाती है मैंने ऐसी में कई मांगों देखी है जो आज अपने बच्चों के मोटिवेट करने पर वह आज अपने हुनर का प्रयोग कर रही है जैसे घर में ही सिलाई करती है कोई पार्लर चलाती हैं।

आज मैं ब्लॉगिंग अपनी बेटी के मोटिवेट करने पर ही करती हूं ।मैंने अपनी बेटियों को बताएं कि मुझे लिखना पसंद है ।तो बोली  मां आप लिखा करो आप यह कर सकती हो हम आपके साथ हैं।

बेटियों के बारे में लिखा जाए तो कभी बातें खत्म ही नहीं होगी फिर मिलते हैं अगले ब्लॉग में एक नई टॉपिक के साथ । 

                                                          धन्यवाद।

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