हेल्लो फ्रेंड्स, स्वागत है आपका मेरे इस ब्लॉग में एक नई टॉपिक के साथ एक लड़की के लिए ससुराल में हर रिश्ते खास होती है पती तो अच्छे होते ही हैं देवर, ननद, ससुर सब रिश्ते अच्छे लगते है लेकिन जब सास की बात आती हैं न बस तो ये रिश्ता उनको निभाना एक टफ टास्क लगता है ऐसा होता भी है परिवार में लड़की हर सदस्य का दिल जीत लेती है लेकिन सास का दिल जीतना समझिए आसमान से तारे तोड़कर लाना है।
और बहू ये भी सास से कम नहीं होती है अगर अपनी मां किसी गलती पर डॉट दे तो किसी को भनक भी नहीं लगने देती है।और सास किसी गलती पर थोड़ा टोक देती है तो बात का बतंगड़ बना कर रख देती है और सबसे पहले अपने मां को ही खबर पहुंचाती है कि मेरी सास बहुत बुरी है बात -बात पर टोकती है।
लेकिन यह सब परेशानियां इसलिए आती है कि हम सास बहू के बीच इगो है। सास का कहना होता है कि मैं इस घर को संभालने में अपने लाइफ का एक लंबा समय लगा दिया है।और बहू का कहना होता है कि अब यह मेरा भी घर है, दोनों अपनी जगह ठीक है। दोनों बहुत ही अच्छे हैं,दोनों का दिल साफ है, लेकिन हम एक दूसरे को समझ नहीं पाते हैं। मैं दोनों के साथ हूं। क्योंकि आज मैं बहु हूं तो कल सास भी बनूंगी। बस जरूरत है एक दूसरे को समझने में। एक दूसरे की कद्र करने में। मान लीजिए हम सास हैं हमारे घर में बहू आ गई तो उसके हर खुशी हर गम का ध्यान हमें ही तो रखना है। लेकिन नहीं अगर एक गलती भी बहू से हुई लगी ताना मारने ,मान लीजिए बहु से रोटी गोल नहीं बनती है तो लगे ताना देने की ,मां ने रोटी बनाना भी नहीं सिखाया। सब्जी में नमक कम ज्यादा हो गया तो मां ने नहीं सिखाया। अरे अगर बहू को नहीं आता तो ,आप ही सिखा दीजिए, आप भी तो मां ही है ना उसकी। आप अपनी बेटी को हाथ पकड़ कर रोटी बनाना सीखाई है ना ये भी तो आपकी बेटी ही हुई ना। लेकिन नही सास बहू के झगड़े तो सब जानते हैं । तालियां एक हाथ से नहीं बजती कुछ गलतियां सास करती है तो कुछ गलतियां बहू, और यही गलती लड़ाई का रूप ले लेती है। सास अगर बहु से बेटी जैसी व्यवहार चाहती है तो आप पहले मां बने और अगर बहू सास से मां का प्यार चाहती है तो पहले आप बेटी बनिए।
कहने का तात्पर्य है की पहले आप बदलिए तभी दूसरे को भी बदल पाएंगे। सास बहू के तू तू मैं मैं तो सभी को पता है और इसके बारे में बहुत सी कहानियां है जिनमें कुछ कहानियां आपको भी पता होगी हर कहानी से हमें कुछ सीख मिलती है है जो हमारे जीवन में बहुत कारगर साबित होती है मैंने यह कहानी एक संत जी के माध्यम से सुनी हूं जो की टीवी चैनल पर भागवत कथा के दौरान बता रहे थे......कहानी कुछ इस प्रकार थी
एक सास थी और एक बहू। शुरू में तो सब ठीक था। लेकिन कुछ समय के बाद दोनों में तू तू मैं मैं शुरू हो गई और धीरे धीरे लड़ाइयां बढ़ती गई। एक दिन बहू अपने मायके चली जाती है। और वह बहुत गुस्से में थी क्योंकि किसी बात पर सास से लड़ाई हुई थी वह अपने पापा से बोली मैं अब अपने ससुराल नहीं जाऊंगी ।मेरी सास बहुत बुरी है वह मुझे बहुत परेशान करती है ,और अगर मैं जाऊंगी तो मुझे ज़हर दीजिए जो मैं अपने सास को खिला दूंगी वह मर जाएगी तभी मैं ससुराल जाऊंगी ।
बहू के पिता एक डॉक्टर थे उन्होंने कहां ठीक है मैं तुम्हें जहर देता हूं लेकिन यह जहर धीरे धीरे काम करेगी तुम रोज 1-1 पुरिया उनके खाना में मिला देना यह 6 महीने का जहर है 6 महीने के बाद तुम्हारी सास मर जाएगी ।बेटी ने पापा से कहा पापा 6 महीने क्यों आप ऐसी दवा दीजिए कि खाने के तुरंत बाद मेरी सास मर जाए डॉक्टर साहब ने कहा तुम्हारी सास इतनी जल्दी मर जाएगी तो सारा इल्जाम तुम पर आएगी और तुम्हें पुलिस पकड़ कर ले जाएगी क्योंकि तुम दोनों की झगड़ों की बात तुम्हारे पड़ोसी तुम्हारे घर के सभी सदस्य जानते होंगे तो उन लोगों को तुम पर शक होगा कि तुम अपनी सास को मार दी हो । तुम 6 महीने तक अपनी सास को हर रोज एक पुड़िया जहर का दाल में मिलाकर खिलाती रहना जहर धीरे-धीरे असर करता रहेगा और एक दिन वह मर जाएंगे तुम इन 6 महीने में अपनी सास का बहुत ख्याल रखना उनकी सेवा करना जब वह कुछ बोले तो चुपचाप सुनती रहना पलट कर जवाब मत देना ऐसा करने से तुम पर कोई शक नहीं करेगा कि तुम अपनी सास को जहर खिलाकर मार दी हो ।
बहू को सारी बातें समझ में आ गई उसने कहा पापा मैं ऐसा ही करूंगी अपने सास को 6 महीने तक बहुत ही प्रेम से रखूंगी जिससे कि किसी को शक मुझ पर ना आए और 6 महीने की तो बात है जैसे तैसे कर लेंगे।वह खुशी से दवाई का पूरिया लेकर अपने घर आई और अपने सास को अच्छे से रखने लगी उसकी सेवा करने लगी सास डांट भी देती थी ,ताने भी मारती तो चुपचाप रह जाती ,पलट कर जवाब नहीं देती थी वह सोचती चलो 6 महीने की बात तो है और खाने के समय दाल में एक दवाई का पुरिया मिलाकर खिला देती थी
कुछ दिनों के बाद सास को लगा कि मेरी बहू अब बदल गई है इसे इतना कुछ कहती हूं फिर भी पलट कर जवाब नहीं देती और मेरी सेवा भी करती हैं धीरे-धीरे अपने बहू से वह प्यार करने लगी और वह भी अब अपनी बहू के साथ अच्छे व्यवहार करने लगी उसके साथ घर के कामों में हाथ बटाने लगी बहू की खुशी के बारे में सोचने लगी उसका ख्याल रखने लगी ऐसा कुछ दिन चलता रहा और सास बहू में मां बेटी जैसा रिश्ता हो गया दोनों के मन में एक दूसरे के प्रति बहुत ही आदर और प्यार जाग गया।अब 6 महीने होने को थे बहू को ख्याल आया कि मेरी सास तो अब मरने वाली है अब वह बेचैन सी रहने लगी नहीं मैं अपने सास के बगैर नहीं रह सकती वह मेरी मां जैसी है वह मेरा इतना ख्याल रखती है और मैं इन्हें मारने चली हूं ।बहु भागे भागे अपने पापा के पास आई और रोने लगी पापा अब ऐसी दवाई दीजिए कि मैंने जो जहर अपनी सास को खिलाई हूं उसका असर खत्म हो जाए मैं सास को मरने नहीं दूंगी वह मेरी मां है मेरी सास बहुत अच्छी है।पापा ने कहा अरे तू ही तो बोल रही थी कि मेरी सांस बहुत बुरी है अब मरने दो ,नहीं पापा मैं बुरी थी इसीलिए मेरी सास मेरे साथ बुरा व्यवहार करती थी अब मैं अच्छी हो गई हूं मेरी सास भी अच्छी हो गई है और अब वह मुझसे बहुत प्यार करती है मैं उन्हें मरने नहीं दूंगी और अपने पापा के पांव में गिर कर रो रही थी कि कोई ऐसा दवाई दीजिए कि मेरी सांस बच जाए पापा ने कहा वह जहर नहीं था विटामिन की दवाई थी जो तुम अपने सास को खिला रही थी मैं जानता था कि तुम अच्छे से रहोगी तो तुम्हारी सास भी अच्छे से रहेगी बहू के मन में अब तसल्ली आई कि मेरी सांस नहीं मरेगी और वह अपने घर खुशी-खुशी लौट आए और उस दिन से अपने सास के साथ बहुत प्रेम से रहने लगे दोनों के मन में कोई शिकवा गिला नहीं था
इस कहानी का तात्पर्य यही है कि किसी भी रिश्ते को निभाने की कोशिश पहले हमें ही करना होगा तभी हम दूसरों से कुछ उम्मीद रख पाएंगे मान लीजिए हम एक अच्छी बहू है ही नहीं तो सास कैसे अच्छी होगी इसी तरह हर रिश्ते में होता है हर रिश्ता हमें संभाल कर रखना चाहिए चाहे हम साथ हो या बहू।अगर आप एक अच्छी बहु बनना चाहती हैंतो मेरा अगला ब्लॉग पढ़िए जिसका टॉपिक होगा
एक अच्छी बहू कैसे बने
धन्यवाद
